Note : This story was published in prestigious Bal Bharati’ magazine for children in July 2024.
इमोजीकीजादुईदुनियाकुछऐसीहोतीहै !
तेरह साल की अनीता को रोज़ रात को डायरी लिखने की आदत थी। वो मम्मी-पापा को गुड नाइट बोलकर अपने कमरे में आई और डायरी लिखने मेज़ कुर्सी पर बैठी। उस दिन घर में उसके जन्मदिन की पार्टी थी। सब बहुत थक गए थे लेकिन अनीता बहुत खुश थी। उसे दोस्तों के दिए हुए तोहफ़े बहुत अच्छे लगे। वो दोस्तों को धन्यवाद के मेसेज भेज रही थी और हर मेसेज में एक इमोजी लगा रही थी। तभी अनीता ने देखा कि उसके स्मार्टफोन में इमोजी कुछ अजीब तरीके से चमक रहे थे। उसने ध्यान से देखा और पाया कि एक इमोजी, जो कि हमेशा खुश रहता था, अब उदास दिख रहा था। अनीता को समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों हो रहा है। वो थोड़ा परेशान हो गई।
अनीता की यही तो खासियत है – वो अपने स्मार्टफोन में मौजूद इमोजी की बहुत बड़ी फैन है। अनीता हमेशा इमोजी भेजकर अपने दोस्तों को हंसाने में लगी रहती है। उसके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती है और उसकी बातें सुनकर सबका मन खुश हो जाता है। इमोजी की दुनिया उसे हमेशा ही प्रभावित करती है। उस रात परेशानी में, अनीता ने डायरी लिखना शुरु किया “अगर इमोजी की अपनी एक दुनिया होती, तो वो कैसी होती?” वो इस बारे में सोचने लगी। सोचते-सोचते अनीता को नींद आ गई और वो सो गई।
जब अनीता जागी, तो खुद को एक जादुई दुनिया में पाया। अनीता ने देखा कि वो एक इंद्रधनुषी रास्ते पर खड़ी है। चारों तरफ़ बादल थे। बादल को गुज़रते हुए जब अनीता आगे बढ़ी। तो उसे वहाँ पेड़ दिखे, उन पर इमोजी लटके हुए थे। सभी अनीता को हाथ हिलाकर बुला रहे थे। अनीता को ये देखकर अचम्भा हुआ। उसने देखा छोटे-छोटे घरों में इमोजी पूरे परिवार के साथ रहते हैं। पार्क में इमोजी झूला झूल रहे हैं। अनीता को ये सम देखकर बहुत मज़ा आ रहा था। वो उसी रास्ते पर आगे चलती रही।
उस रास्ते पर चलते-चलते उसे एक मुस्कुराता हुआ इमोजी मिला। उसने कहा, “नमस्ते! मैं हूँ खुश इमोजी। तुम यहाँ कैसे आई?” अनीता ने हैरान होकर कहा, “मुझे नहीं पता, लेकिन ये जगह तो अद्भुत है! क्या तुम मुझे यहाँ की सैर करवा सकते हो?” यहां चारों तरफ रंगबिरंगे इमोजी हैं। वो खुश इमोजी, दुखी इमोजी, रोते हुए इमोजी और यहां तक कि नींद में खर्राटे लेते हुए इमोजी भी हैं। ये तो कमाल की जगह है।” खुश इमोजी ने मुस्कराते हुए कहा, “बिलकुल! चलो मेरे साथ।”
इमोजी के साथ सैर पर निकल पड़ी अनीता। सबसे पहले वो एक हंसते हुए इमोजी से मिली। वो इमोजी हर समय हंसता रहता था। अनीता ने कहा, “तुम्हारा नाम क्या है?” हंसते हुए इमोजी ने जवाब दिया, “मेरा नाम है LOL इमोजी। मैं सबको हंसाने में माहिर हूँ। अगर तुम उदास हो, तो बस मुझे देख लो, तुम भी हंसने लगोगी।” अनीता ने हंसते हुए कहा, “वाह! तुम तो बहुत मजेदार हो। मैं और मेरे दोस्त अक्सर तुम्हारी बातें करते हैं। हमारी हर बात में तुम्हारा ज़िक्र होता है। तुमसे मिलकर अच्छा लगा।”
आगे चलकर अनीता को एक और इमोजी मिला, जो आँखों से दिल निकालकर देख रहा था। अनीता ने पूछा, “तुम कौन हो?” उस इमोजी ने कहा, “मैं हूँ प्यार इमोजी। जब भी किसी को प्यार का इजहार करना हो, तो लोग मुझे भेजते हैं। मैं सबके दिलों को जोड़ता हूँ।”
अनीता ने प्यार से कहा, “तुम्हारी दुनिया कितनी सुंदर है। यहाँ तो हर तरफ़ ख़ुशी है। तुम सब हर समय हंसते रहते हो या आपस में लड़ते भी हो?” तभी अनीता को एक रोता हुआ इमोजी मिला। उसने दुखी होकर कहा, “तुम क्यों रो रहे हो?” रोता हुआ इमोजी बोला, “मैं दुखी हूँ क्योंकि लोग मुझे सिर्फ अपने दुख जताने के लिए इस्तेमाल करते हैं। लेकिन मैं चाहता हूँ कि लोग समझें कि मेरे आंसू भी खास होते हैं।”
अनीता ने उसे दिलासा देते हुए कहा, “कोई बात नहीं, तुम भी बहुत खास हो। तुम्हारे बिना लोग अपनी भावनाएँ ठीक से बता ही नहीं सकते हैं।” तभी वो दूसरा इमोजी आया जिसके पास आंसू तो थे लेकिन ख़ुशी के आंसू थे। उसे देखकर अनीता ने कहा, ये देखो ये ख़ुशी के आंसू हैं और तुम दुख के। जब हम बच्चों को चोट लगती है तो हमारी आँखों में दुख के आंसू आते हैं। जब मैं अपनी बुआ जी को मेसेज करके बताती हूँ कि मुझे चोट लगी है तब मैं तुम्हारा इस्तेमाल करती हूँ। और जब परीक्षाओं में मेरे अच्छे नंबर आते हैं तो मैं ख़ुशी के आंसू वाले इमोजी भेजती हूँ।
इतने में पास से चिल्लाने और ग़ुस्सा करने की आवाज़ आई। तभी खुश इमोजी ने अनीता से कहा कि अभी तुम कह रही थी न कि हम कितने खुश रहते हैं, आओ तुम्हें ग़ुस्से वाले इमोजी से मिलवाता हूँ। अनीता हंस कर खुश इमोजी के साथ चल दी। दोनों ग़ुस्से वाले इमोजी के पास पहुँचे जिसका रंग लाल हो रहा है। अनीता ने उससे कहा सारे पीले इमोजी में आप लाल इमोजी हैं। मुझे आप बहुत अच्छे लगते हैं। कल ही मेरे दोस्त ने स्कूल में जब मेरी कॉपी पर पानी गिराया तो मैंने उसे ग़ुस्सा किया था। तब मुझे आपकी याद आई थी।
अनीता और इमोजी दोस्त मिलकर इमोजी की दुनिया की सैर करते रहे। हर इमोजी की अपनी एक कहानी है। कुछ इमोजी हंसते, कुछ रोते, कुछ प्यार जताते और कुछ गुस्सा करते। हर इमोजी ख़ास है और उन्हें इस बात का एहसास है। वो इतने काबिल हैं कि हमारी भावनाओं को बिना कुछ कहे ही बता देते हैं। एक इमोजी हज़ार शब्दों का काम कर देता है।
सारे इमोजी एक जगह इकट्ठा थे, खुश थे लेकिन कुछ इमोजी परेशान नजर आ रहे थे। अनीता ने पूछा, “क्या हुआ दोस्तों, आप सब इतने उदास क्यों हो?” खुश इमोजी ने कहा, “अनीता, हम सब इमोजी परेशान हैं क्योंकि लोग हमें सिर्फ मजाक में ही इस्तेमाल करते हैं। वो हमारी असली भावनाओं को नहीं समझते हैं।”
अनीता ने हंसते हुए कहा, “अरे दोस्तों, इसमें तो कोई बड़ी बात नहीं है। आप लोग कितने मजेदार हैं, इससे सभी खुश होते हैं। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी भावनाओं को समझें, तो हमें कुछ खास करना होगा।” इमोजी अब अनीता की तरफ देख रहे थे। अनीता ने सोचा और फिर एक आइडिया आया। उसने कहा, “हम एक इमोजी मेला आयोजित करते हैं। इसमें हर इमोजी अपनी खासियत को दिखाएगा और लोग समझेंगे कि आप सब कितने खास हैं।”
इमोजी ने खुशी से तालियां बजाईं। अनीता और इमोजी ने मिलकर मेला सजाया। वहाँ हर इमोजी का एक स्टॉल था जहां वे अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहे थे। लोग वहाँ आकर इमोजी के साथ खेलते, बातें करते और उनकी भावनाओं को समझते। अनीता ने देखा कि खुश इमोजी अब सचमुच खुश था। उसने कहा, “देखा दोस्तों, अब लोग आपकी असली भावनाओं को समझने लगे हैं। ये मेला हर साल मनाया जाएगा और इसे ‘वर्ल्ड इमोजी डे’ कहा जाएगा।”
सभी इमोजी खुशी से झूम उठे। उस दिन से हर साल 17 जुलाई को वर्ल्ड इमोजी डे मनाया जाने लगा और अनीता के इमोजी दोस्त हमेशा खुश रहने लगे। अनीता ने इमोजी दोस्तों से कहा, “तुम सबने मुझे सिखाया कि भावनाएँ कितनी महत्वपूर्ण होती हैं और उन्हें सही तरीके से व्यक्त करना कितना जरूरी है।” इमोजी दोस्तों ने मिलकर कहा, “हां, अनीता! अगर लोग हमें सही भावना के साथ इस्तेमाल करें, तो हमारी दुनिया और भी खूबसूरत हो जाएगी।”
जब अनीता जागी, तो उसने देखा कि वो अपनी डायरी के पास ही सो रही थी। उसने मुस्कराते हुए अपनी डायरी में लिखा, “इमोजी की दुनिया वाकई में अद्भुत होती। हर इमोजी की अपनी खासियत होती है और हमें उन्हें सही भावना के साथ इस्तेमाल करना चाहिए।” अनीता कमरे से निकली, मम्मी-पापा नाश्ते की टेबल पर बैठे थे। अनीता ने जाकर मम्मी को गले लगाया और अपने सपने के बारे में बताया। पापा ने अनीता को उसके फ़ेवरेट इमोजी के बारे में बहुत ही दिलचस्प बात बताई।
दरअसल इमोजी पहली बार 1990 के दशक के अंत में जापान में दिखाई दिए। इन्हें शिगेताका कुरीता नाम के एक जापानी कलाकार ने बनाया। उन्होंने एक साथ 176 इमोजी बनाई थीं। इमोजी शब्द दो जापानी शब्दों को मिलाकर बनाया गया है। इसमें ‘इ’ का मतलब होता है ‘चित्र’ यानी ‘इमेज’, और ‘मोजी’ या मतलब है ‘चरित्र’ या ‘कैरेक्टर’। इसे पिक्टोरियल मेसेज भी कह सकते हैं।
अनीता इमोजी के बारे में जानकर बहुत ख़ुश हुई। उसने तुरंत शिगेताका अंकल को बहुत सारा शुक्रिया कहा। अनीता ने पापा से कहा कि वो दफ़्तर से लौटते हुए इमोजी वाली किताब ले आएँ। मम्मी ने कहा, किताब आ जाएगी पहले ब्रश करो और फिर नाश्ता। इसके बाद फिलहाल इंटरनेट पर इमोजी के बारे में पढ़ना। अनीता ने नाश्ता किया और इमोजी के बारे में अपनी डायरी में लिखने बैठ गई।
Note : This story was published in prestigious Bal Bharati’ magazine for children in July 2024.
इमोजीकीजादुईदुनियाकुछऐसीहोतीहै !
तेरह साल की अनीता को रोज़ रात को डायरी लिखने की आदत थी। वो मम्मी-पापा को गुड नाइट बोलकर अपने कमरे में आई और डायरी लिखने मेज़ कुर्सी पर बैठी। उस दिन घर में उसके जन्मदिन की पार्टी थी। सब बहुत थक गए थे लेकिन अनीता बहुत खुश थी। उसे दोस्तों के दिए हुए तोहफ़े बहुत अच्छे लगे। वो दोस्तों को धन्यवाद के मेसेज भेज रही थी और हर मेसेज में एक इमोजी लगा रही थी। तभी अनीता ने देखा कि उसके स्मार्टफोन में इमोजी कुछ अजीब तरीके से चमक रहे थे। उसने ध्यान से देखा और पाया कि एक इमोजी, जो कि हमेशा खुश रहता था, अब उदास दिख रहा था। अनीता को समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों हो रहा है। वो थोड़ा परेशान हो गई।
अनीता की यही तो खासियत है – वो अपने स्मार्टफोन में मौजूद इमोजी की बहुत बड़ी फैन है। अनीता हमेशा इमोजी भेजकर अपने दोस्तों को हंसाने में लगी रहती है। उसके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती है और उसकी बातें सुनकर सबका मन खुश हो जाता है। इमोजी की दुनिया उसे हमेशा ही प्रभावित करती है। उस रात परेशानी में, अनीता ने डायरी लिखना शुरु किया “अगर इमोजी की अपनी एक दुनिया होती, तो वो कैसी होती?” वो इस बारे में सोचने लगी। सोचते-सोचते अनीता को नींद आ गई और वो सो गई।
जब अनीता जागी, तो खुद को एक जादुई दुनिया में पाया। अनीता ने देखा कि वो एक इंद्रधनुषी रास्ते पर खड़ी है। चारों तरफ़ बादल थे। बादल को गुज़रते हुए जब अनीता आगे बढ़ी। तो उसे वहाँ पेड़ दिखे, उन पर इमोजी लटके हुए थे। सभी अनीता को हाथ हिलाकर बुला रहे थे। अनीता को ये देखकर अचम्भा हुआ। उसने देखा छोटे-छोटे घरों में इमोजी पूरे परिवार के साथ रहते हैं। पार्क में इमोजी झूला झूल रहे हैं। अनीता को ये सम देखकर बहुत मज़ा आ रहा था। वो उसी रास्ते पर आगे चलती रही।
उस रास्ते पर चलते-चलते उसे एक मुस्कुराता हुआ इमोजी मिला। उसने कहा, “नमस्ते! मैं हूँ खुश इमोजी। तुम यहाँ कैसे आई?” अनीता ने हैरान होकर कहा, “मुझे नहीं पता, लेकिन ये जगह तो अद्भुत है! क्या तुम मुझे यहाँ की सैर करवा सकते हो?” यहां चारों तरफ रंगबिरंगे इमोजी हैं। वो खुश इमोजी, दुखी इमोजी, रोते हुए इमोजी और यहां तक कि नींद में खर्राटे लेते हुए इमोजी भी हैं। ये तो कमाल की जगह है।” खुश इमोजी ने मुस्कराते हुए कहा, “बिलकुल! चलो मेरे साथ।”
इमोजी के साथ सैर पर निकल पड़ी अनीता। सबसे पहले वो एक हंसते हुए इमोजी से मिली। वो इमोजी हर समय हंसता रहता था। अनीता ने कहा, “तुम्हारा नाम क्या है?” हंसते हुए इमोजी ने जवाब दिया, “मेरा नाम है LOL इमोजी। मैं सबको हंसाने में माहिर हूँ। अगर तुम उदास हो, तो बस मुझे देख लो, तुम भी हंसने लगोगी।” अनीता ने हंसते हुए कहा, “वाह! तुम तो बहुत मजेदार हो। मैं और मेरे दोस्त अक्सर तुम्हारी बातें करते हैं। हमारी हर बात में तुम्हारा ज़िक्र होता है। तुमसे मिलकर अच्छा लगा।”
आगे चलकर अनीता को एक और इमोजी मिला, जो आँखों से दिल निकालकर देख रहा था। अनीता ने पूछा, “तुम कौन हो?” उस इमोजी ने कहा, “मैं हूँ प्यार इमोजी। जब भी किसी को प्यार का इजहार करना हो, तो लोग मुझे भेजते हैं। मैं सबके दिलों को जोड़ता हूँ।”
अनीता ने प्यार से कहा, “तुम्हारी दुनिया कितनी सुंदर है। यहाँ तो हर तरफ़ ख़ुशी है। तुम सब हर समय हंसते रहते हो या आपस में लड़ते भी हो?” तभी अनीता को एक रोता हुआ इमोजी मिला। उसने दुखी होकर कहा, “तुम क्यों रो रहे हो?” रोता हुआ इमोजी बोला, “मैं दुखी हूँ क्योंकि लोग मुझे सिर्फ अपने दुख जताने के लिए इस्तेमाल करते हैं। लेकिन मैं चाहता हूँ कि लोग समझें कि मेरे आंसू भी खास होते हैं।”
अनीता ने उसे दिलासा देते हुए कहा, “कोई बात नहीं, तुम भी बहुत खास हो। तुम्हारे बिना लोग अपनी भावनाएँ ठीक से बता ही नहीं सकते हैं।” तभी वो दूसरा इमोजी आया जिसके पास आंसू तो थे लेकिन ख़ुशी के आंसू थे। उसे देखकर अनीता ने कहा, ये देखो ये ख़ुशी के आंसू हैं और तुम दुख के। जब हम बच्चों को चोट लगती है तो हमारी आँखों में दुख के आंसू आते हैं। जब मैं अपनी बुआ जी को मेसेज करके बताती हूँ कि मुझे चोट लगी है तब मैं तुम्हारा इस्तेमाल करती हूँ। और जब परीक्षाओं में मेरे अच्छे नंबर आते हैं तो मैं ख़ुशी के आंसू वाले इमोजी भेजती हूँ।
इतने में पास से चिल्लाने और ग़ुस्सा करने की आवाज़ आई। तभी खुश इमोजी ने अनीता से कहा कि अभी तुम कह रही थी न कि हम कितने खुश रहते हैं, आओ तुम्हें ग़ुस्से वाले इमोजी से मिलवाता हूँ। अनीता हंस कर खुश इमोजी के साथ चल दी। दोनों ग़ुस्से वाले इमोजी के पास पहुँचे जिसका रंग लाल हो रहा है। अनीता ने उससे कहा सारे पीले इमोजी में आप लाल इमोजी हैं। मुझे आप बहुत अच्छे लगते हैं। कल ही मेरे दोस्त ने स्कूल में जब मेरी कॉपी पर पानी गिराया तो मैंने उसे ग़ुस्सा किया था। तब मुझे आपकी याद आई थी।
अनीता और इमोजी दोस्त मिलकर इमोजी की दुनिया की सैर करते रहे। हर इमोजी की अपनी एक कहानी है। कुछ इमोजी हंसते, कुछ रोते, कुछ प्यार जताते और कुछ गुस्सा करते। हर इमोजी ख़ास है और उन्हें इस बात का एहसास है। वो इतने काबिल हैं कि हमारी भावनाओं को बिना कुछ कहे ही बता देते हैं। एक इमोजी हज़ार शब्दों का काम कर देता है।
सारे इमोजी एक जगह इकट्ठा थे, खुश थे लेकिन कुछ इमोजी परेशान नजर आ रहे थे। अनीता ने पूछा, “क्या हुआ दोस्तों, आप सब इतने उदास क्यों हो?” खुश इमोजी ने कहा, “अनीता, हम सब इमोजी परेशान हैं क्योंकि लोग हमें सिर्फ मजाक में ही इस्तेमाल करते हैं। वो हमारी असली भावनाओं को नहीं समझते हैं।”
अनीता ने हंसते हुए कहा, “अरे दोस्तों, इसमें तो कोई बड़ी बात नहीं है। आप लोग कितने मजेदार हैं, इससे सभी खुश होते हैं। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी भावनाओं को समझें, तो हमें कुछ खास करना होगा।” इमोजी अब अनीता की तरफ देख रहे थे। अनीता ने सोचा और फिर एक आइडिया आया। उसने कहा, “हम एक इमोजी मेला आयोजित करते हैं। इसमें हर इमोजी अपनी खासियत को दिखाएगा और लोग समझेंगे कि आप सब कितने खास हैं।”
इमोजी ने खुशी से तालियां बजाईं। अनीता और इमोजी ने मिलकर मेला सजाया। वहाँ हर इमोजी का एक स्टॉल था जहां वे अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहे थे। लोग वहाँ आकर इमोजी के साथ खेलते, बातें करते और उनकी भावनाओं को समझते। अनीता ने देखा कि खुश इमोजी अब सचमुच खुश था। उसने कहा, “देखा दोस्तों, अब लोग आपकी असली भावनाओं को समझने लगे हैं। ये मेला हर साल मनाया जाएगा और इसे ‘वर्ल्ड इमोजी डे’ कहा जाएगा।”
सभी इमोजी खुशी से झूम उठे। उस दिन से हर साल 17 जुलाई को वर्ल्ड इमोजी डे मनाया जाने लगा और अनीता के इमोजी दोस्त हमेशा खुश रहने लगे। अनीता ने इमोजी दोस्तों से कहा, “तुम सबने मुझे सिखाया कि भावनाएँ कितनी महत्वपूर्ण होती हैं और उन्हें सही तरीके से व्यक्त करना कितना जरूरी है।” इमोजी दोस्तों ने मिलकर कहा, “हां, अनीता! अगर लोग हमें सही भावना के साथ इस्तेमाल करें, तो हमारी दुनिया और भी खूबसूरत हो जाएगी।”
जब अनीता जागी, तो उसने देखा कि वो अपनी डायरी के पास ही सो रही थी। उसने मुस्कराते हुए अपनी डायरी में लिखा, “इमोजी की दुनिया वाकई में अद्भुत होती। हर इमोजी की अपनी खासियत होती है और हमें उन्हें सही भावना के साथ इस्तेमाल करना चाहिए।” अनीता कमरे से निकली, मम्मी-पापा नाश्ते की टेबल पर बैठे थे। अनीता ने जाकर मम्मी को गले लगाया और अपने सपने के बारे में बताया। पापा ने अनीता को उसके फ़ेवरेट इमोजी के बारे में बहुत ही दिलचस्प बात बताई।
दरअसल इमोजी पहली बार 1990 के दशक के अंत में जापान में दिखाई दिए। इन्हें शिगेताका कुरीता नाम के एक जापानी कलाकार ने बनाया। उन्होंने एक साथ 176 इमोजी बनाई थीं। इमोजी शब्द दो जापानी शब्दों को मिलाकर बनाया गया है। इसमें ‘इ’ का मतलब होता है ‘चित्र’ यानी ‘इमेज’, और ‘मोजी’ या मतलब है ‘चरित्र’ या ‘कैरेक्टर’। इसे पिक्टोरियल मेसेज भी कह सकते हैं।
अनीता इमोजी के बारे में जानकर बहुत ख़ुश हुई। उसने तुरंत शिगेताका अंकल को बहुत सारा शुक्रिया कहा। अनीता ने पापा से कहा कि वो दफ़्तर से लौटते हुए इमोजी वाली किताब ले आएँ। मम्मी ने कहा, किताब आ जाएगी पहले ब्रश करो और फिर नाश्ता। इसके बाद फिलहाल इंटरनेट पर इमोजी के बारे में पढ़ना। अनीता ने नाश्ता किया और इमोजी के बारे में अपनी डायरी में लिखने बैठ गई।
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